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Tuesday, October 8, 2019

सामानांतर ब्रहम्माण्ड क्या हैl Perallel Universe in Hindi

 सामानांतर ब्रहम्माण्ड क्या है, 

सामानांतर ब्रहम्माण्ड की सच्चाई।


 

(What is pelallel universe in hindi)







 ये तो सभी जानते है, अनंत तक फैले इस ब्रह्ममांड में हमारी पृथ्वी के जैसे और भी गृह मौजूद है। लेकिन क्या आप यह सोच सकते हैं, कि जिस ब्रह्मांड में हमारी धरती मौजूद है हुबहू वैसे ही एक ब्राह्मण भी हो सकता है, जिसमें हमारी पृथ्वी की तरह ही एक पृथ्वी मौजूद हो और उस पृथ्वी में आपका एक प्रतिरूप रहता हो जो दिखने में आपकी तरह हो और आप ही की तरह लाइफ जीता हो।

      ये बात आपको कुछ अजीब लग रही होगी, लेकिन अगर आपने multiverse के बारे में सुना है तो आप समझ गए होंगे कि में किस बारे में बात कर  रहा हूँ l

      Multiverse की theory के अनुसार हमारे ब्रहम्माण्ड की तरह कई सरे अन्य ब्रहम्माण्ड है जिन्हे हम देख नहीं सकते, क्युकी या तो वो हमसे अधिक दुरी पर है या दूसरे आयामों में स्थित है, इन ब्रम्म्हांडो को सामानांतर ब्रहम्माण्ड कहा जाता हैl





     ये theory काफी complicated  है, अगर आप इसके बारे में गहराई से जानने की कोशिश करोगे तो या तो आपकी रूचि इसमें बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी या यह बातें आपको झूठी लगने लगेगी l

   लेकिन समानांतर ब्रह्मांड एक काल्पनिक विषय नहीं है, क्योंकि इस विषय पर वैज्ञानिको ने कई सिद्धांतों पर गहरे एक्सपेरिमेंट के बाद अपने विचार को रखा है।

   1954 में अमेरिकन भौतिक शास्त्री Hugh Everett ने क्वाण्टम लेवल पर गहरे अध्ययन के बाद maniverse interpretation के सिद्धांत को रखा। उनका विचार था कि क्वांटम  लेवल पर पड़ने वाले प्रभाव ब्रह्मांड को लगातार  विभाजित करते हैं।

    यानी आपके द्वारा किए गए प्रत्येक कार्य एक नए ब्रह्मांड  को जन्म देता है और प्रत्येक ब्रह्मांड में आपके लिए गए निर्णय के अनुसार अलग-अलग परिस्थितियां बनती है और उनका अलग-अलग रिजल्ट निकलता है।

   Hugh Everett के इस सिद्धांत के अनुसार हम सब मल्टीवर्स में रह रहे हैं, जहां अन्गिनत ब्रह्मांड मौजूद हैं। इस विषय पर अध्ययन करने वाले कई विज्ञानिक मानते हैं, कि हर संभव घटना का हो  पाना किसी न किसी ब्रह्मांड में बिल्कुल संभव है।

    यानी कि आप अपने जीवन के हर संभव विकल्प के साथ जी रहे हो अलग-अलग यूनिवर्स में लेकिन आप उसे देख नहीं सकते क्योंकि प्रत्येक यूनिवर्स में आप अपने मौजूदा विकल्प के साथ जी रहे हो। जैसे कि इस universe में आप अगर गरीब हो तो हो सकता सकता है कि उस यूनिवर्स में आप बहुत ही अमीर हो।

      यह theory सुनने में बड़ी interesting लगती है लेकिन इसके अलावा और भी कई theory है जो ये बताती हैं कि perallel universe सच में exist करता है, जैसे

 Young's double split experiment

      इस experiment में particals को एक ऐसे meterial में से पास कराया गया, जिसमें दो slis बने हुए थे। particals के पास होने क बाद ये देखा गया क वो दीवार पर लम्बी लाइन्स के जैसे petterns बना रहे थे, इन पेटर्न्स को particular pettern नाम दिया गया।
     लेकिन जब particals की जगह wave को उन slis में से पास कराया गया तो कुछ अलग हो रहा था, wave के केस में slis से निकलने वाले waves बहुत सारे points पर आपस में टकराते हुए दीवार पर दो के बजाय काफी सारे लाइन्स बना रहे थे इस पैटर्न को इंटरफ्रेंस पेटर्न बोलते हैं।

    बाद में इस एक्सपेरिमेंट इलेक्ट्रॉन के साथ किया गया जैसे कि हम जानते हैं कि इलेक्ट्रॉन पार्टिकल होते हैं, यानी कि उसे दीवार पर पर्टिकुलर पैटर्न बनाना चाहिए था, लेकिन जब इसे practically करके देखा गया तो पता चला के ये तो waves की तरह इंटरफेरेंस पैटर्न दिखा रहे थे,
    electron का partical होते हुए wave nature दिखाना वैज्ञानिकों को समझ नहीं आया,  और इसे करीब से देखने के लिए उन्होंने सोचा के एक कैमरा लगाकर बारीकी से देखा जाये की ऐसा क्यों हो रहा है,
        लेकिन इस बार एलेक्ट्रोन्स ने waves की जगह पार्टिकल्स नेचर दिखाना शुरू किया, और दीवार पर पर्टिकुलर पैटर्न बना दिया,
       यानि की जैसे ही हम समानताओं को observe करने लगे उसने इस universe की सम्भावना  मे से एक को चुनकर बाकी सम्भावनाओ को दूसरे uniberse के लिए छोड़ दिया।
        इस एक्सपेरिमेंट में इलेक्ट्रॉन्स का इंटरफेरेंस पैटर्न बनाना सामानांतर ब्रहम्माण्ड theory की और इशारा कर रहा है।

       लेकिन कुछ  विज्ञानिको का मानना ये भी है के पैरलल यूनिवर्स exist ही नहीं करता और यदि करता भी है तो हम उसे देख नहीं सकते और न ही सिद्ध कर सकते है, और जो चीज़े कभी सिद्ध नहीं होती हम उन्हें सच नहीं मान सकते।



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