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Wednesday, January 29, 2020

कैसे पायें नशे से मुक्ति। How can stop addiction in Hindi. नशा कैसे छोड़ें।



    इस दुनियां में हर दूसरा इंसान नशे का आदी है या फिर नशे कि लत का शिकार है। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियां में नशा करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आखिर क्यूं ऐसा हो रहा है? इसके पीछे कौन सी वजह होती है। इस पोस्ट में ऐसी ही जानकारी दी गई है कि आखिर नशा क्या होता है, हमारे दिमाग में ऐसे कौन से सिग्नल और कौन से रसायन होते हैं जो हमें नशे का आदी बनाते हैं और कैसे हम अपने मन को एकाग्र एवं शांत करके नशे की लत से बाहर आ सकते हैं।

क्या है नशा?

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     हर इंसान चाहें वो अमीर हो या गरीब अपनी ज़िन्दगी को ज्यादा मजे से जीना चाहता है मतलब लाइफ को ज्यादा अनुभव करना चाहता है। मगर इस दुनियां में ये सबके लिए मुमकिन नहीं है। क्युकी लाइफ को रोमांचक और ज्यादा अनुभव के साथ जीने का जो सही तरीका है, सारे लोग उसे नहीं अपना पाते यहां में बात कर रहा हूं पैसे की, वक्त की, दोस्त की ओर प्यार की जो सबके पास नहीं होता। किसी के पास पैसा है तो वक्त नहीं, वक्त है तो पैसा या दोस्त नहीं। यहां मेरा ये मतलब नहीं है कि सिर्फ अमीर इंसान ही खुश रह सकता है गरीब नहीं। बल्कि में सिर्फ उन चीजों के बारे में बता रहा हूं जिनके होने से एक इंसान खुद को कंप्लीट फील करता है। चाहे वो अमीर हो या गरीब अगर वो अपनी लाइफ से संतुष्ट है तो वो उसी में जिंदगी का मजा ढूंढ लेता है। लेकिन जो अपनी लाइफ से संतुष्ट नहीं है वो अपनी लाइफ को बेहतर बनाने के लिए शार्टकट्स ढूंडने लगता है। वो ऐसा कोई भी काम करना चाहता है जो उसे ज्यादा अच्छा फील करा सके और फिर वो पहली बार नशा करता है। नशा करने से उसे बहुत अच्छा फील होता है, उसे लगता है कि वो इस दुनिया की सारी समस्याओं को छोड़ किसी और दुनियां में खो गया है, लेकिन तब तक जब तक वो नशे में रहता है। नशा उतरते ही जब वो होश में आता है तब वो अपना सुकून और चैन को खो चुका होता है उसका दिमाग़ फिर से उसी अनुभव के लिए उससे कहता है और वो दुबारा नशा करता है, पहले से ज्यादा मात्रा में करता है। और ज्यादा सेवन से मेंटल इफेक्ट के साथ साथ फिजिकल इफैक्ट भी होने लगते हैं। नशा करके वो व्यक्ति अपनी लाइफ को ज्यादा अनुभव और मजे के साथ जीते हुए आगे ले जाना चाहता है, पर नशे से होने वाले नुकसान उसे पीछे ले जाते हैं।

    अगर आसान शब्दों में कहूं तो कोई इंसान सिगरेट, शराब या कोई भी नशीले पदार्थ का सेवन करता है या फिर गुटके की आदत है तो वो सिर्फ एक किक के लिए करता है जो उसे थोड़ी देर के लिए मिलती है पर वो रास्ता गलत होता है। हालांकि नशा करने से उस इंसान को कुछ समय के लिए अच्छा महसूस होता है पर ये कुछ समय का मज़ा उस व्यक्ति की जिंदगी के बहुत से समय को बर्बाद या कहें तो बिल्कुल शून्य कर देता है। हर दूसरा इंसान किसी ना किसी लत का शिकार होता है चाहें वो शराब सिगरेट तम्बाकू हो या गेम और पोर्न।

नशा क्या करता है। (नुकसान)


     गुटखा, सिगरेट, शराब, ड्रग्स या किसी भी प्रकार का नशा हो उसका थोड़ी मात्रा में सेवन भी शरीर को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन जब यह लत बन जाता है तब इंसान इसका ज्यादा मात्रा में सेवन करता है और जब तक कि वो नशा ना करले तब तक उसे बेचैनी रहती है। यहां तक कि ज्यादा लत जाने की स्थिति में इंसान सामान्य नहीं रहता और तब तक असामान्य रहता है जब तक कि वो नशा ना करले। और यही चीज उसे अंदर से बेहद कमजोर और बीमार बना देती है।
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     तम्बाकू या बीड़ी का सेवन करने से कई लोग फेफड़ों की बीमारी का शिकार होते है। जिसके कारण भारत देश में हर साल कई लोगों की मौत हो जाती है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि फेफड़ों के कैन्सर, मुँह का कैन्सर और गले का कैन्सर का मुख्य कारण तम्बाकू है। जो व्यक्ति बीड़ी या सिगरेट का सेवन करता है। उसके फेफड़ों में पूरी मात्रा में हवा नहीं भर पाती इससे उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है, और उसकी सांस भी फूलने लगती है। जिसके चलते खून पूरी तरह से साफ नहीं हो पाता। इसके अलावा गंभीर खांसी और क्षय रोग का कारण भी तम्बाकू होता है। जिसका लोग बीड़ी में इस्तेमाल करते हैं। तम्बाकू में बहुत सी हानिकारक और जहरीली वस्तुएँ होती हैं। उनमें टार और निकोटीन ये दो प्रमुख हैं। जो कि शरीर में जाकर फेफड़ों का कैन्सर जैसी बीमारियां पैदा करता है। ऐसी बीमारियों का इलाज आसान नहीं होता इसके लिए उच्च स्तर के इलाज की ज़रूरत पड़ती है और इस उच्च स्तर के इलाज से भी सभी लोगों की जिंदगी नहीं बच पाती है। अस्पताल में लाये जाने वाले प्रत्येक तीन रोगियों में से एक रोगी का इलाज ही सफल हो पाता है अर्थात सिर्फ एक ही रोगी की जान बच पाती है बाकी दो की मृत्यु हो जाती हैं। बीसवीं शताब्दी का अति उन्नत विज्ञान भी उन्हें बचाने में असफल रहता है।

     कई मामलों में ये भी देखा गया है कि अधिक मात्रा में बीड़ी, सिगरेट या किसी भी प्रकार का नशा या एल्कोहोल के सेवन करने से व्यक्ति में हार्ट अटैक और हार्ट फेल जैसी बीमारियां होने की संभावना रहती है। ऐसे कई व्यक्ति जिनको ये बीमारियां है उनमें एक चीज़ कॉमन देखी जाती है और वो होती है एल्कोहोल का अधिक मात्रा में सेवन करना। इसी के साथ बीड़ी, तम्बाकू के सेवन से भूक कम होती है और पाचन शक्ति कमजोर होने लगती है। जिससे व्यक्ति खाना खाने के सही समय का पता नहीं चल पाता और जो खाना वो खाता है वो भी सही से पच नहीं पाता। जिससे व्यक्ति के शरीर में कमजोरी आ जाती है। शरीर दुर्बल हो जाता है जिससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और वो इंसान कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाता है। ऐसे इंसान की जिंदगी बहुत ही तनाव पूर्ण एवं कठिन हो जाती है। वो जब तक नशे में रहता है तभी तक इस तनाव से दूर रहता है। नशा उतरते ही वो फिर से तनावपूर्ण स्थिति में आ जाता है। इसलिए वो बार बार नशा करता है और हर वक्त नशे की ही हालत में रहना चाहता है। क्युकी इससे उसको सुकून मिलता है।

     ऐसा कोई भी इंसान जो नशा करता है अपना तो नुकसान करता ही है साथ में जो लोग उससे जुड़े होते है उनको भी नुकसान पहुंचाता है। सामान्य शब्दों में कहूं तो नशे का असर इंसान की आंतरिक मामलों के साथ साथ सामाजिक मामलों पर भी पड़ता है। नशा करने से इंसान अपना आत्मविश्वास खो देता है और अपनी बुद्धि का नाश करता है। जिसका असर उसकी जिंदगी पर ये पड़ता है कि उसके परिवार में हमेशा कलेह की स्थिति होती है। परिवार के साथ अच्छे दोस्त भी दूर हो जा है। दुनियां के किसी भी काम में मन नहीं लगता और किसी भी रिश्ते की अहमियत समझ में नहीं आती।

कैसे पायें नशे से मुक्ति


    अगर आप नशा नहीं करते तो आप बहुत सौभाग्यशाली (Lucky) इंसान हैं। लेकिन अगर आप भी किसी लत के शिकार हैं और सोचते हैं कि कैसे पायें नशे से मुक्ति तो आपको पहले ये समझना होगा कि आखिर कैसे हम किसी लत के शिकार बन जाते हैं। नशे को अगर हम वैज्ञानिक रूप में समझे तो, नशे का मैन कारण होता है केमिकल्स यानी दिमाग में भरे रसायन। हमारे दिमाग में बहुत सारे रसायन (chemicals) होते है जो अलग अलग अनुभव और भावनाओ से हमारे दिमाग में रिलीज होते हैं। जैसे एंडोर्फिन, ऑक्सीटोसिन, सेरेटराइन, और डोपामिन। , जब आप किसी दूसरे इंसान को टच करते हो जैसे गले लगाना या हाथ मिलाना उस समय आपको जो महसूस हो रहा होता है ये ऑक्सीटोसिन के कारण होता है। ऑक्सीटोसिन को बॉन्डिंग  केमिकल भी कहा जाता है। क्युकी ये रसायन जब रिलीज़ होता है तब हम अच्छा फील करते हैं।
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     याद करो वो मूमेंट जब किसी ने आपकी तारीफ की हो या आपके बारे में सबके सामने कुछ अच्छा बोला हो। उस वक्त आप अंदर से फूल जाते हो। उस समय आप जो महसूस कर रहे होते हो वो बहुत ही लाजवाब होता है। इस समय हमारे दिमाग में सेरेटराइन रसायन रिलीज होता है और इसी के चलते आप ऐसा महसूस कर पाते हो

   वहीं एंडोर्फिन हमारे दिमाग़ में जब रिलीज होता है जब हम एक्सरसाइज करते हैं या कोई भी फिजिकल एक्टिविटी करते हैं या अच्छे कपड़े पहनते हैं तब आपको अच्छा फील होता है जिसका कारण यह रसायन ही होता है।
 
    इन सब के अलावा एक और रसायन होता है जो सबसे पॉवरफुल होता है जिसे डोपामिन कहते हैं यही वो केमिकल है जिसकी वजह से हमारा कोई शौक या आदत हमारी लत बन जाती है। इस रसायन के रिलीज होने से हमें जो फीलिंग आती है या हम जो महसूस करते है वो हमें इतना अच्छा लगता है कि हम बार बार इसे अनुभव करना चाहते हैं। गजब बात ये है कि ये गुटका, सिगरेट, एल्कोहोल और बाकी नशीली चीजो के सेवन करने के समय निकलता है।

 
       अब हम ये तो समझ चुके हैं कि हम कैसे नशे के जाल में फंसते हैं और क्यों लत के शिकार हो जाते हैं। तो अब जान लेते हैं कि कैसे हम इस जाल से बाहर निकाल सकते हैं। इसके लिए बहुत सी दवाएं और इलाज होते हैं। लेकिन मैं आपको किसी दवाई के बारे में नहीं बताऊंगा। क्यूंकि दवाई के असर से हमारी लत तो छूट जाती है लेकिन इसके कई बुरे प्रभाव भी पड़ते हैं। अगर देखा जाए तो इसकी दवाई भी एक नशा होती है जब तक इसका असर रहता है  इंसान नशा नहीं करता। असर खत्म होने के बाद भी इंसान का दिमाग नशे की तरफ नहीं जाता। लेकिन अगर इंसान नशा कर लेता है तो फिर से वही रसायन के चलते वो इसका आदी हो सकता है। डोपामिन के साथ बाकी रसायन भी लत के लिए कहीं ना कहीं जिम्मेदार होते हैं। इसलिए इंसान के मन का नशे से दूर होना बहुत ज़रूरी है ताकि हमारी इच्छाशक्ति मजबूत हो और हमारे मन में नशे को लेकर एक सोच बन जाए कि नहीं नशा नहीं करना है।

1  सफल बनने का नशा 


    दोस्तो नशा हो या कुछ और केमिकल्स को आपको सही डायरेक्शन में लाने की ज़रूरत है। क्युकी डोपामिन हमारे दिमाग से रिलीज हो इसमें कोई बुराई नहीं है। क्योंकि डोपामिन जब निकलता है जब हम अच्छा महसूस करते हैं। लेकिन अगर वो नशे से निकले तो गलत है। तो ऐसा बनो की डोपामिन आपको नशे से नहीं बल्कि सफलता से मिले।

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2  स्वस्थ रहने का नशा

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    वर्कआउट करने से हमारे शरीर को क्या फायदा होता है ये बताने की जरूरत नहीं है। सभी जानते हैं कि इससे हम कई बीमारियों से बचे रहते हैं और हमारा स्वस्थ ठीक होता है। जिन लोगों को वर्क आउट करने की आदत हो जाती है उन्हें बिना वर्कआउट करे अच्छा महसूस नहीं होता। उनका दिन ही शुरू होता है वर्कआउट के साथ। ऐसा एंडोर्फिन रसायन के चलते होता है। यह रसायन हमारे शरीर में कसरत करते समय रिलीज़ होता है। जो हमें अच्छा महसूस करता है। अगर आपको ये लत लग जाए तो आपकी नशे की लत अपने आप छूट जाएगी। इसके लिए आपको जिम जाना आवश्यक नहीं है। आप घर पर ही इसकी शुरुआत कर सकते हैं। थोड़े से शुरुआत करें और फिर धीरे धीरे इसे बढ़ाते जाएं।

3  नए दोस्त बनाना

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     नशा करने की एक बड़ी वजह अकेलापन भी होता है। जिस इंसान को नशे की लत है या तो वो अंदर से अकेला होता है या उसकी इस लत के चलते वो अपने परिवार और दोस्तों से संपर्क ख़तम करके अकेला हो जाता है। हमारी जिंदगी में दोस्तों की जो अहमियत होती है उस शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। दोस्त वो होता है जो आपको सुनता है जिसके साथ आप अच्छा महसूस करते हो। इसलिए हमेशा खुश रहो लोगों को समझो उनके साथ अच्छे संबंध बनाओ। ये आदत भी आपको नशे की आदत से दूरी बनाने में मदद करेगी। क्युकी नशे की लत आपको असल दुनियां से दूर ले जाती है, जहां आप अकेले ही रह जाते हों। लेकिन जो लोग लोगों से अच्छे संबंध बनाने की आदत अपनाते हैं वो हमेशा वास्तविक दुनियां में जीते हैं और हमेशा तनावमुक्त रहते हैं।

4  अहंकार (ego) ख़तम करें


    अहंकार हमारा बहुत बड़ा दुश्मन होता है। जितने भी सक्सेसफुल लोग होते हैं उन्हें ये बात पता होती है वो हमेशा इससे दूर रहते हैं। इसलिए आपने देखा होगा कि जितने में बड़े लोग होते हैं उनमें से ज्यादातर लोग विनम्र (humble) होते हैं और इसीलिए वो बड़े बन पाते हैं। आप खुद सोचिए जो इंसान घमंडी होगा क्या लोग उसे पसंद करेंगे, बिल्कुल नहीं। अगर आपको लोगों के साथ अच्छे रिश्ते बनाने है या उनके दिलों पर राज करना है तो अपने ईगो (Ego) को कम करना होगा। तभी लोग आपको पसंद करेंगे। आपने देखा होगा कि लोग नशे में ऐसी बातें बोल जाते हैं जो सामान्य स्थिति में नहीं बोल पाते। ऐसा वो नकली आत्मविश्वास (fake confidence) के चलते बोल पाते हैं। क्युकी नशा हमारे अंदर अहंकार को बढ़ाता है और अहंकार नकली आत्मविश्वास को। जिन लोगों में अहंकार नहीं होता या कम होता है उन लोगों में से बहुत कम ही लोग नशे कि लत के शिकार होते हैं। तो अपने ईगो को कम करिए जहां ज़रूरी हो वहीं दिखाइए। लोगों के साथ अच्छे रिश्ते बनाएं और वास्तविक दुनियां में जिएं।

5  दूरी को बड़ाएं 


    किसी भी लत को तुरंत छोड़ पाना संभव नहीं। इसलिए धीरे धीरे कोशिश करें। कोई भी नशा छोड़ने के लिए पहले उसकी मात्रा कम करें। अगर आपको शराब की लत है तो शराब का पैग छोटा कर दें या सिगरेट पीते हैं तो इसकी संख्या कम करे। मतलब जितनी सिगरेट आप दिन में पीते हैं उसमें से धीरे धीरे एक कम करते जाएं। अपने पास लाइटर, माचिस, गुटखे की पुड़िया, तंबाकू रखना छोड़ दें। ऐसे लोगों से दूरी बनाएं जिन्हें देखकर आपको नशे की याद आती है जिसके साथ आप नशा करते हैं।

6  नई और अच्छी आदतें बनाएं 


    किसी भी आदत या लत को हम ख़तम नहीं कर सकते क्युकी हमारा दिमाग हमें इसकी इजाज़त कभी नहीं देता। लेकिन हम उस आदत या लत को बदल ज़रूर सकते हैं। इसके लिए बस आपको अपनी आदत जिसे आप बदलना चाहते हैं किसी दूसरी आदत से एक्सचेंज करना है। जैसे अगर आप सिगरेट या तम्बाकू का सेवन करते हैं और इस आदत को बदलना चाहते हैं तो आपको हर रोज़ इसके सेवन कि मात्रा को कम करना है और इसकी जगह इलायची, सौंफ ले सकते हैं। धीरे धीरे आपकी पुरानी आदत छूट जाएगी।

 7  मन में ठानें 


    जैसा कि आप जानते हैं कि नशे को छोड़ने के लिए मानसिक तौर पर मजबूत होना ज़रूरी है। ताकि कोई भी  आपको नशा करने के लिए कमज़ोर ना कर पाए। क्युकी जब तक आपका मन नशे से दूर नहीं होगा कोई और आपका नशा नहीं छुड़ा पाएगा। इसलिए मन में ये ठान लेंना ज़रूरी है कि आप नशा छोड़ना चाहते हैं। शुरू में अपनी बात पर निर्भर रहने में दिक्कत आएगी। लेकिन अपने मन को मजबूत रखें। ऊपर जो जानकारी दी गई है इस पर अमल करें इससे आप मानसिक तौर पर मजबूत बनेंगें। लत छोड़ने की वजहों को दिन में बार-बार मन में दोहराएं। ताकि ये बात आपके अवचेतन मन तक बैठ जाए।

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8  ईश्वर का ध्यान


 हमारा मन एक राजा की भांति होता है ये जब तक नहीं बैठता जब तक इसके बैठने लायक जगह इसको ना मिले। एक व्यक्ति जो नशे का आदी है और वो व्यक्ति जो ईश्वर का ध्यान करता है दोनों का मकसद एक ही होता है अपने मन को शांत करना। लेकिन नशा एक गलत रास्ता है ये बात हमारा मन नहीं समझ पाता क्युकी वो उसी में अच्छा महसूस करता है और वहीं बैठ जाता है। लेकिन अगर उसे बैठने के लिए सिंहासन दे दिया जाए तो वो नशे की तरफ नहीं जाता। यहां में बात कर रहा हूं ईश्वर के ध्यान कि, उसकी इबादत कि उसकी पूजा की क्यूंकि हमारा मन जिस शांति और अनुभव की तलाश में जिंदगी भर भटकता रहता है वो उसे कहीं और नहीं ईश्वर में ही मिलती है।


         ये जो तरीके मैने आपको इस पोस्ट में बताए हैं असल में वो आदतें हैं। ऐसी आदतें जिन्हें अपनाने से आप नशे या किसी भी बुरी लत से धीरे धीरे दूर हो जाते हैं। इसके अलावा इन आदतों से आपको और भी कई फ़ायदे होते हैं और आपको ऐसी खुशी और संतोष मिलता है कि दुनियां का कोई भी नशा नहीं दे सकता। अगर जानकारी अच्छी लगी हो तो शेयर करके ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में हमारी मदद करें। अगर कोई सवाल है तो हमसे कॉमेंट के माध्यम से पूछ सकते हैं।


धन्यवाद् !

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