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Saturday, January 11, 2020

Subconscious mind power॥ अवचेतन मन को कैसे जाग्रत करें॥ How to reprogram your subconscious mind?

Subconscious Mind Power॥ अवचेतन मन को कैसे जाग्रत करें। 


      दोस्तों दुनियां में सभी लोग सफल होना चाहते हैं। उन में से कुछ लोग तो अपने लक्ष्य को लेकर क्लियर ही नहीं होते। लेकिन कुछ लोग लक्ष्य को लेकर बिल्कुल साफ होते है, यानी की वो ये निश्चित कर चुके होते है कि उन्हें क्या करना है और कैसे करना है। लेकिन उनमें से भी सिर्फ दस प्रतिशत लोग ही अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर पाते हैं। क्युकी  वो दस प्रतिशत लोग ही अपने अवचेतन मन की शक्ति (subconscious mind power) का डायरेक्टली (directly) या इंडायरेक्टली(indirectly) इस्तेमाल कर पाते हैं।


क्या है अवचेतन मन(what is Subconscious mind power)?
अवचेतन मन को कैसे जाग्रत करें। अवचेतन मन को कैसे जगाए।
Subconscious-mind-reprogramming


       अवचेतन मन (Subconscious Mind) हमारे मन का वो 90% हिस्सा है जिसके बारे में बहुत से लोग नहीं जानते और जो जानते वो भी इसका सही इस्तेमाल करना नहीं जानते। अगर आप भी उन्हीं लोगों में से है या आप ये सोचते है कि ऐसा कुछ नहीं होता तो भी ये लेख आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।

      दोस्तो आपने आइसबर्ग (iceberg) के बारे मैं तो जरूर सुना होगा। अगर नहीं सुना तो मैं आपको बता देता हूं पानी पर तैरती हुई बर्फ की चट्टान को आइसबर्ग कहते हैं। आइसबर्ग की खास बात यह होती है कि जितना यह पानी के ऊपर नजर आता है वह सिर्फ 10 परसेंट ही होता है,और उसका 90 परसेंट हिस्सा पानी के नीचे होता है। इसी तरह होता है हमारा माइंड, इसके की भी दो पार्ट्स होते हैं चेतन मन (conscious mind) और अवचेतन मन (subconscious mind)। चेतन मन हमारे दिमाग का 10 परसेंट ही होता है और वही अवचेतन मन हमारे माइंड का 90% होता है।
अवचेतन मन को कैसे जाग्रत करें। अवचेतन मन को कैसे जगाए
Subconscious_mind_reprogramming


      आईसबरग के छुपे हुए हिस्से की तरह हमारा अवचेतन मन (subconscious mind) भी छुपा हुआ होता है यानी की हम इसका सही से यूज नहीं कर पाते हैं। वहीं हमारा चेतन मन (conscious mind) तार्किक (logical) होता है, ये प्रश्न (question) करता है और सोच समझकर निर्णय (decision) लेता है। 
   दूसरी तरफ अवचेतन मन  (subconscious mind) होता है ये प्रश्न नहीं करता निर्णय नहीं लेता, लेकिन हमारी लाइफ हमारे एक्शन्स और हमारी भावनाओ (feelings) पर प्रभाव डालता है। ये हमारे अंदर छुपे खजाने के जैसा होता है।


इसे हम एक उदाहरण द्वारा अच्छे से समझ सकते हैं

       आपको याद है कि जब आप बचपन में साइकल चलाना सीख रहे थे। उस समय आपको समझ नहीं आ रहा था कि कैसे साइकिल पर संतुलन बनाना है, आपका ध्यान कभी हैंडल्स तो कभी पेडल्स पर जाता था लेकिन आपने कयी बार उसका अभ्यास (prectice) की और धीरे धीरे आप साइकिल चलाना सीख गए। और अब जब भी आप साइकिल चलाते है तो आपको अपने दिमाग को ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना पड़ता मतलब कैसे आपको ब्रेक लगाना है कैसे हैंडल को संभालना है सब अपने आप ही होने लगता है।

      ऐसा इसलिए होता है कि जब आप साइकिल चलाना सीख रहे होते हैं तो आपका चेतन मन काम करता है और आप बार-बार प्रैक्टिस करते हैं तो यह आपके अवचेतन मन (subconscious mind) में सेव हो जाता है। और एक बार जो इस में सेव हो जाता है तो सारे सिग्नल ऑटोमेटिक आपके माइंड पर आने लगते हैं। दोस्तो अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ज़रूरी होता है कठिन परिश्रम (hardwork) जो कि आप जब कर पाओगे जब आपका मन तैयार हो। अगर हम अपने अवचेतन मन की रिप्रोग्रामिंग इस प्रकार से कर दें कि हमारे लक्ष्य (goals) इसमें सेव (save) हो जाए तो हमारे लिए इन लक्ष्यों को पूरा करना और भी आसान हो जायेगा। लेकिन अब सवाल ये है कि हम ऐसा कैसे कर सकते है तो उसके लिए दो तकनीक है। इन तकनीकों से हम अपने लक्ष्यों को अपने दिमाग में वैसे ही सेव कर पाएंगे जैसे हमने साइकिल के balance करने को किया था और वैसे ही automatically अपने गोल्स को पाने के लिए कठिन परिश्रम भी कर सकेंगे जैसे साइकिल को balance करने लग गए। तो आइए जानते है उन तकनीकों के बारे में-

1-   दृश्य (Visualisation)


       Visualisation एक ऐसी तकनीक है जिससे आप अपने गोल्स को अपने अवचेतन मन तक पहुंचा सकते हैं इसमें आपको Visualise करना है उन गोल्स को जिन्हें आप पाना चाहते हैं उन सपनों को जिन्हें आप पूरा करना चाहते हैं। जैसे अगर आप सक्सेसफुल होना चाहते हैं तो आपको विसुअलाइज करना है कि आप सफल हो चुके हैं और अब आप जो भी सपने हैं उन्हें अब आप पूरा कर रहे हैं अगर आप शायद तो अभी कर सकते हैं उसके लिए दिमाग शांत कर अपने सपनों में सोचना है। यकीन मानिए आप वैसे ही मेहनत करने लगेंगे जैसे आपको सफल होने के लिए करनी चाहिए। क्युकी किसी बात को बार बार सोचने से वो आपके माइंड में सेव हो जाएगी।

2-    प्रतिज्ञान (Affirmation) 

       दूसरी तकनीक  है एफर्मेशन अगर आप विजुलाइज नहीं कर सकते हैं तो आप अपनी लाइफ का vision लिख कर भी अपने goals को अवचेतन मन में सेव कर सकते हैं। इसमें आपको पेन से कागज पर उन goals को लिखना है जिन्हें आप पाना चाहते हो, साथ में यह भी लिखना है कि आप क्यों उन्हें पाना चाहते हो और खुद के लिए इस नोट्स को रोज पढ़ना है। इस तकनीक  से आप अपने गोल्स को अपने अवचेतन मन में सेव कर पाओगे हैं। और आपका अवचेतन मन आपसे जब तक मेहनत करवाता रहेगा जब तक आप अपने गोल्स को पा ना लें।


      अगर अभी आप ये सोच रहे हैं कि इनसे कुछ नहीं होगा, या इन तकनीकों से कैसे हमारा मन हमारे एक्शन्स पर प्रभाव डाल सकता है। तो आप साइकिल वाली स्टोरी को एक बार फिर समझिये। साइकिल सीखते समय सभी गिरते हैं चोट भी लगती है और आपको भी लगी होगी। लेकिन फिर भी क्यों हम बिना निराश हुए सिर्फ साइकिल सीखने पर अपने ध्यान को केन्द्रित करते हैं। इसका कारण ये टेक्निक्स ही होती है जिनका हम जाने अनजाने में इस्तेमाल कर रहे होते हैं। क्योंकि जब हम साइकिल सीखना चाहते हैं तो हमारे दिमाग में साइकिल सीखने के बाद की एक फिल्म चल रही होती है कि आप साइकिल सीखने के बाद दूर दूर घूम सकते हैं। आपके दिमाग के पास एक वजह होती है कि अगर आप साइकिल चलाना सीख गए तो आप बिना थके ज्यादा दूर जा सकते है। और इन कारणों से आपको साइकिल सीखने में मजा आने लगता है और मज़े के चलते कयी बार गिरने और चोट खाने के बाद भी आपका मन आपको इस काम को करने के लिए मना नहीं करता।

       इसमें कोई शक नहीं कि जिस काम को करने में हमें मजा आता है उस काम के लिए हम कैसे भी वक्त निकाल ही लेते है। तो अगर हमें उन कामों को करने में मजा आने लगे जो हमारे कठिन लक्ष्य को पूरा करने के लिए हमें करने है तो फिर हमें उन लक्ष्यों को पूरा करने से कोई नहीं रोक सकता। पर यहां सवाल ये है कि वो काम जो हमें कठिन लगते है जिन्हें हमारा मन हमेशा टालता रहता है आखिर वो कैसे हमें आसान लगेंगे और हमें कैसे उनमें मजा आ सकता है, यहीं काम करती हैं हमारी ये तकनीके इनसे आपको यह अहसास होता है कि आपका लक्ष्य आपके लिए कितना जरूरी है। और आप उसे पूरा करने के लिए उन कामों को करने लगते हैं जो ज़रूरी हैं और जो आपको कठिन लगते हैं। पर यह भी सच है के कोई काम कठिन नहीं होता बल्कि जो आपको कठिन लगता है रोज करने वाले को वही आसान लगता है। और जब आप उसे रोज करने लगते है तो वो आपको भी आसान लगता है। चाहें वो रोज़ पड़ाई (study) करना हो या gym जाकर वर्कआउट करना। बस हमारे मन की प्रोग्रामिंग सही होनी चाहिए। क्योंकि हमारा अवचेतन मन एक खेत की तरह होता है इसमें हम जैसा बीज बोते हैं यह वैसा ही फल हमें देता है अगर हम नकरात्मक (negative) रहेंगे तो हम सकारात्मक (positive) फल नहीं पा पाएंगे। इसके लिए हमें हमेशा positive रहना होगा।


   आशा करता हूं ऊपर दी गई जानकारी Subconscious mind power आपको पसंद आयी होगी।

धन्यवाद!


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