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Sunday, February 16, 2020

विराट कोहली की पूरी कहानी प्रेरणदायक। Virat Kohli biography in hindi. । विराट कोहली की जीवनी।

विराट कोहली की पूरी कहानी

      विराट कोहली एक ऐसा नाम है जिसके बारे में हम सब जानते हैं। जो कि भारतीय टीम के बेहतरीन बल्लेबाज हैं। विराट कोहली अपने बेहतरीन खेल के अलावा फिटनेस और गुड लुक्स कि वजह से भी जाने जाते हैं। विराट कोहली से आज करोड़ों लोग प्रेरणा लेते हैं। विराट कोहली की पूरी कहानी प्रेरणादायक है। विराट कोहली को भारतीय टीम की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है। दाएं हाथ के बल्लेबाज विराट कोहली को दुनिया के सबसे महान बल्लेबाजों में गिना जाता है, इसीलिए आज विराट कोहली के प्रशंसक सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हैं। विराट कोहली अपने खेल को लेकर इतने गंभीर हैं कि एक इंटरव्यू में वो बताते हैं कि जब वो खेलने उतरते हैं तो एक परिस्थिति ऐसी भी आती है कि उन्हें वो 50000 लोग दिखाई नहीं देते जो उनका खेल देखनें आए हैं न मैदान में बाकी 11 खिलाड़ी दिखाई देते हैं यहां तक कि बॉलर भी दिखाई नहीं देता, सिर्फ बॉल दिखाई देती हैं।
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     इस पोस्ट में हम विराट कोहली की पूरी कहानी, जैसे विराट कोहली की जीवनी, विराट कोहली का करियर, विराट कोहली का संघर्ष, विराट कोहली का अनुभव और उनसे जुड़ी ऐसी कुछ बाते जानने वाले हैं जो उन्हें दुनियां के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में शामिल करती हैं। विराट कोहली ने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत की है और उनकी कहानी किसी मोटीवेशन से कम नहीं है। विराट कोहली की पूरी कहानी बहुत ही प्रेरणदायक है। इसीलिए में आपसे निवेदन करूंगा इस पोस्ट को जरूर पढ़ें।

विराट कोहली की जीवनी (Virat Kohli Biography in Hindi)


     विराट कोहली का पूरा नाम 'विराट प्रेम कोहली' है। उनका निक नेम चीकू है। विराट कोहली का जन्म 5 नवम्बर 1988 को दिल्ली के एक पंजाबी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम प्रेम कोहली और उनकी माता का नाम सरोज कोहली है। विराट के पिता एक वकील थे और उनकी मां सरोज कोहली एक घरेलू महिला हैं। विराट कोहली के एक बड़े भाई और बहन भी हैं जिनका नाम विकास कोहली और भावना कोहली है। विराट कोहली ने दिसमबर 2017 में बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा के साथ शादी की।
   
    विराट कोहली की प्रारंभिक शिक्षा विशाल भारती पब्लिक स्कूल से हुई थी जो की दिल्ली में स्थित है। विराट बताते हैं कि तीन साल की उम्र में उन्होंने पहली बार बल्ला पकड़ा था। भले ही वो प्लास्टिक का था लेकिन 3 साल की उम्र में ही उनके पिता ने उन्हें क्रिकेट से परिचित करा दिया था। वो खुद बॉल को फेक कर विराट से बल्ले से मारने के लिए बोलते थे। उम्र बढ़ने के साथ साथ विराट कोहली का मन क्रिकेट में लगता चला गया। विराट जब 9 साल के थे जब पड़ोसियों के कहने और खेल में उनके बेहतर प्रदर्शन के चलते उनके बेहतर भविष्य के लिए उनके पिता ने उन्हें क्रिकेट क्लब में शामिल करा दिया था। उनको पड़ाने वाले शिक्षकों की मानें तो विराट पढ़ाई में भी अच्छे थे। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि क्रिकेट प्रेम के चलते विराट ने केवल 12वीं तक ही स्कूली शिक्षा हासिल की और इसके बाद उन्होंने पूरी तरह से क्रिकेट पर ध्यान लगाना शुरु किया। विराट अपनी सफलता के पीछे अपने पिता का हाथ बताते हैं। उनके पिता ने उन्हें हर कदम पर सपोर्ट किया क्युकी वो खेल को लेकर विराट की दिलचस्पी को अच्छे से समझते थे।


विराट कोहली का करियर 

A  विराट कोहली का घरेलू कैरियर

     विराट कोहली ने अपने कैरियर की शुरूआत साल 2002 में दिल्ली की अंडर-15 टीम से की थी। अपने कैरियर के पहले टूर्नामेंट में ही उन्होंने अपनी टीम के लिए 172 रन बनाए थे और विराट इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ भी बन गए थे। 2004 में विराट को दिल्ली की अंडर 17 टीम में विजय मर्चेंट ट्रॉफी खेलने का मौका मिला। जिसमें विराट ने काफ़ी अच्छा प्रदर्शन किया और अपनी टीम को जीत दिलाई। विराट के इसी अच्छे प्रदर्शन के चलते उन्हें भारत की अंडर 19 टीम में शामिल किया गया और उनका पहला विदेशी टूर इंग्लैंड था।

     विराट ने इंग्लैंड की अंडर 19 टीम के खिलाफ 105 रन बनाकर काफी अच्छा प्रदर्शन किया इस सीरीज में भारत की टीम ने जीत हासिल की। इसके बाद 2008 में विराट को भारत की अंडर 19टीम का कप्तान बना दिया गया। उन्होंने मलेशिया में होने वाले अंडर 19 विश्व कप में भारत की कप्तानी करी थी। इस टूर्नामेंट में विराट  तीसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले और उन तीन बल्लेबाजों में शामिल थे जिन्होंने शतक लगाए थे। अंडर 19 टीम में खेलते हुए विराट ने कई शानदार रिकॉर्ड अपने नाम किये। इस टूर्नामेंट के बाद विराट का सेलेक्शन वन डे इंटरनेशनल मैच के लिए हुआ था। जिसमें टीम को ये मैच श्रीलंका के खिलाफ खेलना था। 2011 में विराट को वर्ल्ड कप खेलने के लिए भी टीम में चुना गया था। जिसमें भारत ने जीत हासिल की थी। विराट ने अपना पहला टेस्ट मैच भी 2011 में खेला था जो कि वेस्टइंडीज के खिलाफ था।

B  विराट कोहली इंटरनेशनल मैच करियर

      विराट कोहली का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैरियर 2008 में ही शुरू हो गया था और उन्होंने अपना पहला मैच श्रीलंका के खिलाफ खेला था। इस मैच के लिए विराट का चयन एक चमत्कार माना जाता है। क्यूंकि इस दौरान टीम के सलामी बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग घायल होने की वजह से टीम से बाहर थे और विराट को इन की जगह खेलने का मौका मिला था। इस समय वो केवल 19 साल के ही थे और उन्होंने इन मैचों में बेहतरीन प्रदर्शन किया।
अपने पहले मैच में उन्होंने 12 रन बनाए। उन्होंने चौथे मैच में 54 रन बनाते हुए अपना पहला अर्धशतक लगाया। इस सीरीज को भारत ने 3 - 2 से जीता। जो कि भारत की श्रीलंका के खिलाफ वन डे सीरीज़ की पहली जीत थी।

    इसके बाद 2009 में विराट कोहली को युवराज सिंह के चोटिल होने के कारण उनके स्थान पर ICC चैंपियंस ट्रॉफ़ी खेलने का मौका मिला। वहीं युवराज सिंह की वापसी पर
विराट कुछ मैचों में नहीं खेल सके। इसके बाद विराट को 2010 में सचिन तेंदुलकर के विश्राम लेने पर उनकी जगह पांच मैचों में खेलने का मौका मिला। कोहली को जून 2010 में जिम्बाब्वे में श्रीलंका और जिम्बाब्वे के खिलाफ त्रिकोणीय सीरीज के लिए एकदिवसीय टीम का उप कप्तान बनाया गया। उस समय टीम  के सभी अनुभवी खिलाड़ी इस टूर्नामेंट से विश्राम के चलते बाहर थे।
 
    इसी सीरीज में विराट कोहली एकदिवसीय क्रिकेट में सबसे तेज 1000 रन बनाने वाले भारतीय बन गए थे और इतना ही नहीं 2010 में विराट टीम के सभी अनुभवी बल्लेबाजों को पीछे छोड़ते हुए भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ बने। कोहली को जून २०१० में जिम्बाब्वे के खिलाफ T20 शृखला के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया था। वहीं साल 2011 में विराट कोहली ने टेस्ट मैच में अपनी जगह बना ली थी। और वो 2011 में वर्ल्ड कप खेलने वाली टीम का हिस्सा थे। विराट ने वर्ल्ड कप में 9 पारियों में 282 रन बनाए थे।

    2012 में जब भारत को एशिया कप खेलना था उस समय विराट के अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए विराट को भारतीय टीम का उपकप्तान बना दिया गया और उन्होंने एक मैच में पाकिस्तान के खिलाफ 183 रन का स्कोर सिर्फ 148 गेंदों में बनाया था। जिसमें एक छक्का और 22 चौके शामिल हैं। विराट के इस शानदार प्रदर्शन से भारत की जीत हुई। इसके लिए विराट को मैन ऑफ द मैच से भी नवाजा गया था।

   2014 में पहली बार विराट को टेस्ट मैच में भारत की कप्तानी करने का मौका मिला। उस समय महेंद्र सिंह धौनी चोट के कारण टीम का हिस्सा नहीं थे। लेकिन आज सब जानते हैं और जो नहीं जानते उन्हें बता दूं कि विराट कोहली आज भारतीय टीम की तीनों फॉर्मेट की कप्तानी संभाल रहे हैं।

C  विराट कोहली का इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में करियर 

     विराट कोहली का ipl में कैरियर 2008 से ही शुरू हो गया था। मार्च 2008 में विराट को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने 30000 डॉलर में खरीदा था। ये वो समय था जब विराट की भारतीय टीम में कोई ख़ास जगह नहीं थी। उस समय विराट की उम्र केवल 20 वर्ष थी। उस सीज़न में विराट ने RCB के लिए 13 मैच खेले और 15 के एवरेज के साथ 165 रन बनाए थे।

     अपने कैरियर के पहले IPL सीज़न में तो विराट अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए लेकिन दूसरे सीजन यानि 2009 में उन्होंने अपनी टीम RCB को फाइनल तक पहुंचा दिया था। इस सीज़न में विराट ने 22 की ऑसत से 246 रन बनाए थे। 2011 में विराट को भारतीय टीम का उपकप्तान बनाया गया था। IPL के इस सीज़न में विराट कोहली ने अपने प्रदर्शन में काफी सुधार किया था। विराट कोहली के इसी प्रदर्शन के चलते उन्हें RCB का कप्तान बनाने की चर्चा शुरू हो गई थी।

    2013 में डैनियल विटोरी के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद विराट कोहली को RCB का कप्तान बनाया गया। IPL की इस सीज़न में विराट ने 45.29 की औसत से 634 रन बनाए और अपनी टीम को तालिका के पांचवे स्थान पर पहुंचा दिया। विराट कोहली के इस स्कोर में 6 अर्धशतक भी शामिल थे।

    2014 के IPL सीज़न में विराट का प्रदर्शन ज्यादा अच्छा नहीं रहा। इस सीज़न में विराट ने 28 की औसत से 359 रन बनाए। इस सीज़न में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर तालिका में सातवें स्थान पर रही। इसी वर्ष एमएस धोनी के टेस्ट मैच की कप्तानी से रिटायरमेंट लेने के बाद विराट को टेस्ट की कप्तानी दे दी गई।

    पिछले सीजन में खराब प्रदर्शन के बाद विराट ने अगले सीजन में अपने प्रदर्शन में सुधार किया और उन्होंने 45.90 के औसत से 505 रन बनाए और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने  पांचवां स्थान हासिल किया।

    2016 के IPL सीज़न में विराट कोहली ने अपनी फॉर्म को बरक़रार रखा। इस साल विराट एशिया कप और टी-20 में भी भारत के लिए खेले और इन मैचों में भी अपना शानदार प्रदर्शन किया। इस साल विराट ने इंडियन प्रीमियर लीग में  कई रिकॉर्ड बनाए जिसमें उनके एक ही संस्करण में 4 शतक शामिल है। साथ ही 2016 के संस्करण में ऑरेन्ज कैप के विजेता भी यही रहे। उनके इसी प्रदर्शन के कारण उनकी कीमत 2018 IPL में 18 करोड़ हो गई।


       विराट कोहली लगातार सफलता की ओर बढ़ते जा रहे थे। हम जब उनके कैरियर को देखें तो ऐसा लगता है कि विराट को ये सब बहुत आसानी से मिल गया। वो बहुत लकी थे या जैसे उनका वक्त उनके हिसाब से दौड़ रहा हो। लेकिन ऐसा नहीं है ये लक नहीं कुछ और था जो उन्हें सफलता की ओर ले जा रहा था। जानेंगे उसके बारे में और विराट कोहली के बारे में कुछ ऐसी बातें जो आपको बहुत कुछ सीखने में मदद करेंगी। लेकिन उससे पहले विराट कोहली की उपलब्धियों पर एक नजर डालते हैं।

विराट कोहली की उपलब्धियां

   विराट कोहली ने क्रिकेट के कई रिकॉर्ड्स अपने नाम किए हैं। इसमें कोई शक नहीं कि वो दुनियां के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ों में गिने जाते हैं। उन्हें कई अवॉर्ड्स से नवाजा गया है-

(1)  2012 में विराट को 'पीपुल चॉइस अवॉर्ड फॉर फेवरेट क्रिकेटर' (People choice award for favorite cricketer) और' आाईसीसी ओडीआई प्लेयर ऑफ द इयर अवॉर्ड' (ICC ODI Player of the year) से नवाजा गया।

(2) विराट को 2013 में अर्जुन अवॉर्ड फॉर क्रिकेट (Arjun Award For Cricket) दिया गया।

(3) 2017 में सीएनएन-आईबीएन 'इंडियन ऑफ द इयर' (CNN-IBN Indian of the year) मिला। और भारतीय सरकार द्वारा 'पदम श्री अवॉर्ड' से नवाजा गया।

(4)  2018 में 'सर गर्फिएल्ड सोबर्स ट्रॉफी' (Sir Garfield sobers trophy) से विराट को नवाजा गया।

(5)  'राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार' (Rajiv Gandhi Khel Ratna) भी विराट को मिल चुका है जो कि 2018 में ही उन्हें मिला था।

(6)  'विसडन लीडिंग क्रिकेटर इन द वर्ल्ड' (Wisdon leading cricketer in the world) विराट को 2016, 2017 और 2018 में मिला है।

विराट कोहली कैसे बने नम्बर वन

   विराट कोहली आज यहां तक पहुंच पाये, इसके पीछे सिर्फ उनका लक नहीं है। वो यहां तक पहुंच पाये क्यूंकि वो एक अच्छे खिलाड़ी हैं, और एक अच्छा खिलाड़ी लक से नहीं बल्कि संघर्ष, मेहनत, लगन, जुनून और त्याग से बनता है। विराट कोहली की पूरी कहानी प्रेरणादयक है। ये उनका जुनून ही था जो उन्हें दिल्ली की गलियों से भारतीय टीम की कप्तानी में ले आया। विराट कोहली आज दुनियां के महान बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि सारी दुनियां में उनके करोड़ों प्रशंसक और फॉलोअर हैं। अगर विराट की मानें तो वो इसके पीछे क्रिकेट को लेकर अपने प्यार को बताते हैं। वो कहते हैं कि वो यहां तक पहुंच पाए क्यूंकि वो क्रिकेट से प्यार करते हैं और इसका सम्मान करते हैं। विराट कोहली की लाइफ से जुड़ी ऐसी बहुत सी बातें हैं जो बताती हैं उनके संघर्ष, और उनके नम्बर वन बनने के बारे में, आइए जानते हैं

    हर किसी की लाइफ में कुछ ऐसा जरूर होता है जो उसकी पूरी पर्सनैलिटी को बदल देता है। विराट के साथ भी ऐसा ही हुआ था जिसने उन्हें एक सफल और महान खिलाड़ी बनने में मदद की। उस समय विराट केवल 17 साल के थे, और दिल्ली के फिरोज शाह कोटला मैदान में दिल्ली की टीम से कर्नाटक के खिलाफ रणजी ट्रॉफी का मैच खेल रहे थे। वो बताते हैं कि  रात के 3 बज रहे थे जब उन्हें फोन आया कि उनके पिताजी को अटैक आया और उनकी मौत हो गई है।  जब उनके कोच को ये बात पता चली तो उन्हें लगा कि विराट अब ये मैच नहीं खेल पाएंगे। क्यूंकि विराट अपने पिता से बहुत प्यार करते थे। लेकिन उस दिन विराट ने अपनी भावनाओं को कंट्रोल किया और मैदान में 90 रनों की पारी खेली।

   विराट कोहली के जीवन की इस घटना से ये समझ में आता है कि वो मानसिक तौर पर कितने मजबूत हैं। उनकी मां बताती हैं कि इस घटना के बाद विराट में एक बदलाव आया था। जिसने उन्हें आज नंबर वन बना दिया।

    इसमें कोई शक नहीं कि IPL तक पहुंचना बहुत मुश्किल होता है और वहां तक पहुंचना हर क्रिकेटर का सपना होता है। विराट कोहली का IPL कैरियर 2008 में शुरू हो गया था। उस समय विराट को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर द्वारा 2000000 रुपए में खरीदा गया था। इतने पैसे काफी होते हैं एक 18 साल के लड़के को भटकाने के लिए, और कुछ ऐसा ही हुआ। विराट बताते हैं कि उस समय वो IPL की चमक और ग्लैमर में फस गए थे, और अपना डायरेक्शन भूलते जा रहे थे। विराट की माने तो ये उनकी लाइफ का सबसे लॉवेस्ट प्वॉइंट था। लेकिन विराट ने ना सिर्फ अपने आप को कंट्रोल किया बल्कि अपने आप को और बेहतर खिलाड़ी बनाने के लिए मेहनत की।

    पूर्व आस्ट्रेलियन क्रिकेटर 'ग्लेन मैकग्रा' (Glenn McGrath) बताते हैं कि एक टेस्ट मैच में जब वो कमेंट्री कर रहे थे। तो उस समय जिस होटल में वो रुके हुए थे उसी होटल में भारतीय टीम भी ठहरी हुई थी। रोज़ सुबह जब वो जिम जाते तो वहां उन्हें विराट कोहली वर्कआउट करते मिलते थे। उस समय वहां उनके अलावा कोई और प्लयेर नहीं होता था। हालांकि विराट उस समय भी नंबर वन थे पर फिर भी वो इतनी मेहनत कर रहे थे। क्यूंकि जितना मुश्किल नंबर वन बनना है उतना से ज्यादा मुश्किल है नंबर वन बने रहना।

   चेतेश्वर पुजारा एक इंटरव्यू में कहते हैं कि जिस तरह विराट कोहली घंटो अपनी फिटनेस, फील्डिंग और बैटिंग पर काम करते हैं शायद ही कोई और प्लयेर हर दिन एक ही रूटीन बार बार फॉलो कर पाए। विराट खुद बताते हैं कि उनकी लाइफ बहुत बोरिंग है। वो हर दिन एक ही रूटीन फॉलो करते हैं।


     इसमें कोई संदेह नहीं कि विराट कोहली की पूरी कहानी बहुत ही प्रेरणादयक है। अगर आप को विराट कोहली की पूरी कहानी प्रेरणादायक लगी हो तो कमेंट के माध्यम से हमें बता सकते हैं, और इस जानकारी को शेयर करके ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में हमारी मदद भी कर सकते हैं।

धन्यवाद्।

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