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Sunday, March 1, 2020

मंगल ग्रह से जुड़ी कुछ खास जानकारियां। Fact about Mars in Hindi. मंगल ग्रह से जुड़े रहस्य।

दोस्तो अब तक जो जानकारी हमारे पास है उसके हिसाब से सिर्फ एक ही ग्रह पर जीवन संभव है और वो ग्रह प्रथ्वी है। प्रथ्वी के अलावा किसी और ग्रह पर जीवन की विचार करना तो ठीक है लेकिन अभी ये संभव नहीं। लेकिन अगर मंगल ग्रह की बात की जाए तो ये एक ऐसा ग्रह है जो काफी हद तक प्रथ्वी से मिलता है। चलिए जानते हैं मंगल ग्रह से जुड़ी कुछ खास जानकारियां

मंगल ग्रह से जुड़ी कुछ खास जानकारियां

दोस्तो मंगल ग्रह से हम इंसानों का बहुत पुराना संबंध है। सदियों से इंसान मंगल ग्रह से जुड़ी जानकारियों को जानने को लेकर उत्सुक रहा है। कई पुरानी सभ्यताओं में भी मंगल की जानकारी मिली है। उस जानकारी से ऐसा लगता है कि जैसे उन्हें मंगल के बारे काफी अच्छी जानकारी थी। मंगल की सबसे पहले दूरबीन से गेलीलियो ने देखा था।

मंगल वो ग्रह है जो सौर मंडल में चोथे नम्बर पर है। हमारी पृथ्वी सौरमंडल में तीसरे नंबर पर है। मंगल सूरज से 14.2 करोड़ मील की दूरी पर है। इसके अलावा अगर आकार की बात की जाए तो हमारी प्रथ्वी का व्यास 7,926 मील है, वहीं मंगल का व्यास सिर्फ 4,220 मील है। प्रथ्वी की तुलना में मंगल ग्रह लगभग इसका आधा है।

जैसा कि हम सब जानते हैं कि एक साल में 365 दिन होते हैं। लेकिन मंगल पर एक साल 687 दिन का होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारी पृथ्वी को सूरज का चक्कर लगाने में 365 दिन का समय लगता है इसीलिए यहां 365 दिन का एक साल होता है। वहीं मंगल को सूरज का पूरा चक्कर लगाने में 687 दिनों का समय लगाता है इसलिए वहां का साल 687 दिन का होता है। पृथ्वी की तरह ही मंगल के पास भी चांद हैं। हमारी प्रथ्वी के पास सिर्फ एक वहीं मंगल के पास दो चांद हैं। जिनका नाम फ़ोबोस और डेमियोस है।
मंगल-ग्रह-से-जुड़ी-कुछ-खास-जानकारियां।  Fact about Mars in Hindi
मंगल-ग्रह-से-जुड़ी-कुछ-खास-जानकारियां

समय-समय पर मंगल पर जांच के लिए वैज्ञानिकों द्वारा कई कोशिशें की गईं हैं और अब भी जारी हैं। अब तक जो जानकारी हमारे पास है उस के अनुसार मंगल जैसा आज है सदियों पहले ऐसा नहीं था। प्रमाणों की मानें तो किसी समय में मंगल जीवों के रहने लायक था, या सदियों पहले वहां कभी जीवन था। कई शोधों में वहां जीवों की मोजुदगी का भी अहसास हुआ है। लेकिन इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं मिल पाया है।

क्यों जरूरी है मंगल ग्रह की जांच

दोस्तो पृथ्वी के अंत को लेकर बहुत से वैज्ञानिकों एवं विद्वानों द्वारा भविष्यवाणी की गई हैं जिनमें से कई गलत साबित हुई हैं और कुछ का पता हमें समय आने पर चल जाएगा। भले ही कुछ भविष्यवाणियां झूटी साबित हुई हों लेकिन यह बात एकदम सत्य है कि हमारी दुनिया धीरे-धीरे विनाश की ओर तेजी से बढ़ रही है और इसका कारण कोई और नहीं बल्कि इसका एक बड़ा कारण हम इंसान ही है।

पृथ्वी पर बढ़ती जनसंख्या के साथ खतरे भी बढ़ते जा रहे हैं। पिछले दो दशकों यानि पिछले दो सौ साल में इंसान ने धरती के लगभग 10 प्रतिशत जंगलों को खत्म कर दिया है। बिना किसी वजह के केवल अपने स्वार्थ के लिए पेड़ों को काटा जा रहा है। प्रथ्वी से पेड़ों का कम होना प्रथ्वी को विनाश की ओर ढकेल रहा है। क्यूंकि पेड़ प्रकृति का हमारी पृथ्वी के साथ संतुलन बनाए रखते हैं। इनका ना होना या कम होना प्रथ्वी को असंतुलित कर रहा है।
(ये पोस्ट भी जरूर पढ़ें - पेड़ों के बारे में आवश्यक जानकारी )

इसके अलावा जनसंख्या के साथ साथ हर रोज़ हमारे यातायात के साधनों की संख्या भी बढ़ती जा रही है और इन साधनों एवं फैक्ट्रियों से निकलने वाला खतरनाक धुआं हमारे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा रहा है।  धुएं से कई जहरीली गैसें हमारे वायुमंडल में फैल रही हैं जो हमारे पर्यावरण को बहुत भारी नुकसान पहुंचा रही हैं।

इन सब कारणों से प्रथ्वी पर कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बड़ती जा रही है। जिसके साथ पृथ्वी का तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। जिसके चलते ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और समुद्र के स्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है।

2016 में हुए एक अध्ययन के मुताबिक पिछले 100 सालों में समुंदर का पानी बढ़ने की रफ्तार पिछले 27 सदियों में सबसे ज्यादा तेज रही है यानी हमारी दुनिया धीरे-धीरे विनाश की ओर बढ़ती जा रही है और साथ ही जीवन भी ऐसे में एक नए ग्रह की खोज बहुत जरूरी है जहां पर जीवन संभव हो। ताकि प्रथ्वी को भी बचाया जा सके और जीवन को भी। क्यूंकि अगर मंगल पर जीवन संभव होता है तो प्रथ्वी पर जनसंख्या के साथ कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा भी कम होगी और प्रथ्वी के खतरे भी कम होंगे

क्या इंसान मंगल तक पहुंच सकता है ?

दोस्तों पृथ्वी और मंगल ग्रह मौसम और अक्षिय झुकाव समान है, मतलब मंगल पर भी प्रथ्वी की तरह ही चार मौसम होते हैं। इतना ही नहीं मंगल ग्रह और प्रथ्वी में इसके अलावा और भी कई समानताएं हैं। जैसे पृथ्वी की तरह ही मंगल पर पहाड़ और घाटियां हैं। इतनी सब समानताएं होने के बाद भी सवाल उठता है कि क्या मंगल ग्रह पर जीवन संभव है? क्या मंगल ग्रह तक हम इंसान पहुंच सकते हैं? आइए जानते हैं इन सवालों के बारे में


मंगल-ग्रह-से-जुड़ी-कुछ-खास-जानकारियां।  Fact about Mars in Hindi
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दोस्तों मंगल की प्रथ्वी से दूरी चार हजार करोड़ किलोमीटर है और अगर इस समय कोई इंसान मंगल पर जाता है तो जो साधन अभी उपलब्ध हैं उनके अनुसार हमें मंगल पर जाने के लिए 8 से 10 महीने तक का वक्त लगेगा। इतने समय तक प्रथ्वी से बाहर यानि अंतरिक्ष में रहना काफी नुकसानदायक है। क्यूंकि वहां का गुरुत्वाकर्षण बल शून्य होता है। ऐसे में जरूरी है कि कम से कम समय में मंगल तक पहुंचा जाए। लेकिन इसके लिए हमें वो साधन चाहिए होंगे जो हम कम समय में मंगल ग्रह पर पहुंचा पाएं। जिसके लिए सिर्फ नासा ही  नहीं अन्य कंपनियां भी कार्य कर रही हैं ।

लेकिन मान लो किसी भी तरह से कोई इंसान मंगल तक पहुंच जाएं, तो वो जीवित नहीं रह पाएगा। क्योंकि मंगल का ज्यादातर हिस्सा रेगिस्तान है। जहां का तापमान 27° सेल्सियस से लेकर -133° तक होता है। यहां ऑक्सीजन की मात्रा केवल 0.14% है जो कि सांस लेने के लिए काफी नहीं है और यहां सूर्य की पराबैंगनी किरणें सीधी पड़ती हैं जो कि इंसान के लिए काफी नुकसानदायक है। इसके अलावा मंगल का गुरुत्वाकर्षण बल प्रथ्वी का केवल 38% ही है यानी कि पृथ्वी पर अगर आप का वजन 100 किलोग्राम है तो मंगल पर सिर्फ 38 किलोग्राम ही रह जाएगा। इतना कम गुरुत्वाकर्षण बल किसी इंसान के रहने लायक नहीं है। जो कि एक बड़ी समस्या है।

 जब कोई अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में 0% गुरुत्वाकर्षण बल में काम करता है तो यह देखा गया है कि उसकी हड्डियों और मांसपेशियों में हर हफ्ते दो पर्सेंट की कमी आ जाती है।

क्या मंगल ग्रह पर जीवन संभव है ?(Can we live on Mars?)

इस वक्त जो जानकारी उपलब्ध है उसके हिसाब से मंगल इस समय इंसान के रहने लायक बिल्कुल नहीं है। लेकिन तकनीक की मदद से भविष्य में मंगल को इंसान के रहने लायक बनाया जा सकता है। इसके लिए हमें मंगल पर ऐसे पारदर्शी घर बनाने होंगे तो चारों तरफ से हवा के प्रभाव को रोक सकें। ताकि बाहर की हवा और जलवायु का इं पारदर्शी घरों के अंदर कोई प्रभाव ना पड़े।
मंगल-ग्रह-से-जुड़ी-कुछ-खास-जानकारियां।  Fact about Mars in Hindi
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कुछ समय पहले नासा के द्वारा एक परीक्षण किया गया था इसमें परीक्षण में नासा ने पृथ्वी से बाहर एक अंतरिक्ष  स्टेशन पर  ग्रीन हाउस में सब्जी को उगाया था।

इस परीक्षण के बाद वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तकनीक से उन पारदर्शी घरों में पेड़ पौधे उगाए जा सकते हैं जिससे वहां ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाया जा सकता है। नासा की मानें तो इसी साल 2020 में उसके द्वारा पर एक मार्सरोवर भेजा जाएगा जो वहां ऑक्सीजन बनाने के लिए परीक्षण करेगा।

इसके अलावा वैज्ञानिक आर्टिफिशियल ग्रैविटी पर काम कर रहे हैैं। इस तकनीक की मदद से मंगल पर जो पारदर्शी घर बनाए जाएंगे उनमें इंसान के लिए गुरुत्वाकर्षण बल को बढ़ाया जा सकेगा और उन पारदर्शी घरों को इंसानों के रहने लायक बनाया जाएगा। जिससे मंगल पर पृथ्वी जैसे ही गुरुत्वाकर्षण बल का आभास हुआ।

मंगल पर अत्यधिक मात्रा में मैथेन गैस पाई जाती है जो कि हमारे लिए काफी लाभदायक है। मैथेन गैस ईंधन के रूप में इस्तेमाल की जाती है। यदि भविष्य में वहां मानव के कदम पड़ते हैं तो इस गैस को मानव द्वारा ईंधन के रूप में काम में लिया जा सकेगा। इस गैस का पता क्यूरियोसिटी रोवर द्वारा दी गई जानकारी में चला था। क्यूरियोसिटी रोवर नासा द्वारा 2012 में भेजा गया था।


आशा करता हूं कि मंगल ग्रह से जुड़ी कुछ खास जानकारियां  जो इस पोस्ट में आपको दी गईं हैं आपको पसंद आयेगी। 

धन्यवाद्।

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