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Thursday, March 12, 2020

स्वामी विवेकानन्द के विचार हिंदी।। Swami Vivekananda Quotes

स्वामी विवेकानन्द के विचार हिंदी ।। (Swami Vivekananda Quotes in Hindi.)

   स्वामी विवेकानन्द जी किसी परिचय के मोहताज नहीं,  स्वामी विवेकानन्द जी को उनके ज्ञान, विचार और उनकी गहरी सोच के लिए जाना जाता है। बेहद कम उम्र में ही इन्‍होंने वेद और दर्शन शास्‍त्र का अच्छा ज्ञान हासिल कर लिया था।

विवेकानन्द जी को उनके गुरु की प्रति अत्यधिक सेवा के लिए भी जाना जाता है, इन्होंने अपना जीवन अपने गुरु को समर्पित कर दिया था, और अपने गुरु से प्रेरित होकर सिर्फ 25 साल की उम्र में ही गुरु सांसारिक मोह-माया का त्‍याग कर सन्यास ग्रहण कर लिया था।
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स्वामी विवेकानन्द के विचार हर युवा के लिए एक प्रेरणा का केंद्र है, 12 जनवरी को भारत में हर साल राष्‍ट्रीय युवा द‍िवस इसी लिए मनाया जाता है क्यूंकि 12 जनवरी 1863 में विवेकानन्द जी का जन्म हुआ था। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी विवेकानन्द जी को प्रेरणास्रोत माना जाता है। इस पोस्ट में आपको स्वामी विवेकानन्द के 20 अनमोल और प्रेरक विचारों के बारे में बताया गया है, जो कि आपकी सोच और ज़िन्दगी जीने का नज़रिया बदल सकते हैं।


स्वामी विवेकानन्द के विचार 

1. उठो गो और तब तक मत रुको,
     जब तक तुम्हें, तुम्हारा लक्ष्य प्राप्त न हो जाए


    2. हम वही बनते हैं जो हम सोचते हैं,

    इसलिए इस बात का ध्यान रखिए कि आप क्या सोचते हैं।


    3. जो तुम सोचते हो वो हो जाओगे।

    यदि तुम खुद को कमज़ोर सोचते हो,
    तो कमज़ोर हो जाओगे,
    अगर खुद को ताकतवर सोचते हो तो ताकतवर हो जाओगे।


    4. एक विचार लो, 

    उस विचार को अपना जीवन बना लो,
    उस विचार को सोचो, उसके सपने देखो,
    उस विचार को जियो।
    अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों और शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो, और बाकी सभी विचारों को किनारे रख दो।
    यही सफल होने का तरीका है और यही सफलता का सूत्र है।


    5. एक समय में एक ही काम करो,

    और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा और पूरा ध्यान उसमें डालदो
    और बाकी सब कुछ भूल जाओ।


    6. हम जो बोते हैं वो काटते हैं , हम स्वयं अपने भाग्य के विधाता हैं , 

    हवा बह रही है, जिन जहाजों के पाल खुले होते हैं, हवा के टकराने से वो आगे अपनी दिशा में बढ़ते जाते हैं,
    लेकिन जिन जहाजों के पाल बंधे होते हैं वो आगे नहीं बढ़ पाते, क्या इसमें हवा की गलती है?


    7. निर्भय व्यक्ति ही कुछ कर सकता है डर - डर कर चलने वाले लोग कुछ नहीं कर सकते हैं , 

    किसी भी चीज से डरो मत, तभी तुम अद्भुत काम कर सकोगे, निडर हुए बिना जीवन का आनंद नहीं लिया जा सकता है ।
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    8. स्वतंत्र होने की हिम्मत करो। 

    तुम्हारे विचार तुम्हें जहाँ तक ले जाते हैं वहां तक जाने की हिम्मत करो, और अपने विचारों को जीवन में उतारने की हिम्मत करो।


    9. किसी की निंदा ना करें,

     अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं तो ज़रूर बढाएं, अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपने हाथ जोड़िये, अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये, और उन्हें उनके रास्ते पर जाने दीजिये।


    10. कभी मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है, 
    ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है, अगर कोई पाप है, तो वो ये कहना कि तुम निर्बल हो या कोई और निर्बल हैं।


    11. जिस व्यक्ति के साथ श्रेष्ठ विचार रहते हैं, वह
     कभी अकेला नहीं होता है।


    12. हम जितना ज्यादा बाहर जायें और दूसरों का भला करें,
     हमारा हृदय उतना ही शुद्ध होगा, और उसमें परमात्मा बसेंगे।


    13.  किसी से कुछ मत मांगिये,

    किसी से कोई अपेक्षा मत रखिए,
    चुपचाप अपने कार्य में लगे रहिए ।


    14. तुम्हे अन्दर से बाहर की तरफ विकसित होना है, कोई तुम्हे पढ़ा नहीं सकता, कोई तुम्हे आध्यात्मिक नहीं बना सकता। सिवाए
     तुम्हारे क्यूंकि तुम्हारी आत्मा के आलावा तुम्हारा कोई और गुरु नहीं।


    15. किसी भी वस्तु को खरीदा या छिना जा सकता है, लेकिन ज्ञान स्वाध्याय के जरिए हीं पाया जा सकता है, इसे न तो खरीदा जा सकता है और किसी से छिना जा सकता है।



    16. जो भी चीज तुम्हें कमजोर बनाती है, 

    उन चीजों को बद समझाकर त्याग दो ...
    तभी तुम उन्नति कर पाओगे ।


    17. दूसरों की मदद के इंतजार में समय गंवाना मूर्खता है, खुद पर निर्भर रहकर ही आप सफलता पा सकते हैं।



    18. जब तक जीवित हो तब तक अपने और दूसरों के अनुभवों से सीखते रहना चाहिए , क्योंकि अनुभव सबसे बड़ा गुरु होता है।


    19. लोग तुम्हारी प्रशंसा करें या आलोचना , तुम्हारे पास धन हो या न हो, तुम्हारी मृत्यु आज हो या बड़े समय बाद हो, तुम्हें अपने पथ से बहकना कभी नहीं चाहिए।


    20. खड़े हो जाओ और हिम्मत करके अपनी सारी ज़िम्मेदारी खुद ले लो, यह तय करो कि अब से अपनी असफलता के लिए किसी और को दोषी नहीं ठहराओगे, न किसी और के भरोसे कोई काम करने की सोचोगे, तभी तुम अपने भाग्य निर्माण खुद कर पाओगे और तुम्हारा भविष्य तभी उज्ज्वल होगा ।


    आशा करता हूं कि स्वामी विवेकानन्द के विचार आपके लिए प्रेरणादायक रहे होगें, अगर लगे हैं तो इस पोस्ट को शेयर कर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में हमारी मदद जरूर करें।


    धन्यवाद्।


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