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Friday, May 1, 2020

Kamal ka phool ॥ कमल का फूल। The Lotus flower

कमल का फूल ॥ Kamal ka phool (The Lotus flower)


   हमारी प्रथ्वी को कुदरत ने बहुत से ऐसे अनमोल तोहफे दिए हैं जो प्रथ्वी की सुंदरता को बढ़ाते हैं। अगर फूलों की बात की जाए तो ये कुदरत का एक ऐसा वरदान हैं जो कि बेमिसाल है। वैसे तो बहुत सी नसल के फूल प्रथ्वी पर मौजूद हैं, लेकिन दोस्तो आज GyanSpot Hindi की इस पोस्ट में जिस फूल के बारे में बताया गया है वो है, कमल का फूल (kamal ka phool)
kamal-ka-phool ॥ Lotus flower
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हमारा देश उन देशों में से है जिन्हें कुदरत ने काफी अनमोल खज़ानों से नवाजा है। भारत में कमल का फूल उन फूलों में गिना जाता है जिन्हें विशेष स्थान प्राप्त है। कमल का वैज्ञानिक नाम ''निलम्बो न्यूसीफेरा" (Nelumbo Nucifera) है। यह आकर्षक और सुंदर फूलों में गिना जाता है। चलिए जानते हैं कमल के बारे में कुछ खास बातें।


कमल का फूल (about the Lotus flower)

कमल का फूल शुद्धता, सुंदरता, समृद्धि, ज्ञान, आदि का प्रतीक माना जाता है, ये फूल भारत में प्रकृति की एक उल्लेखनीय रचना माना जाता है। भारत में कमल के फूल को ‘इंडियन लोटस’ या ‘सेक्रेड लोटस’ के रूप में भी जाना जाता है।


1 भारत का राष्ट्रीय फूल

कमल के फूल के बारे में माना जाता है कि ये भारतीय सभ्यता से लंबे समय से जुड़ा हुआ है। कुछ शोधों में कमल का फूल प्राचीन सभ्यताओं का हिस्सा भी माना गया है। कमल को भारत में संस्कृती, सभ्यता, अध्यात्म, पवित्र, पूजनीय, सुंदरता, सदभावना, शांति, स्मृति और बुराईयों से मुक्ति का प्रतीक भी माना जाता है।  यही कारण है कि कमल भारत का राष्ट्रीय फूल है।


2 धार्मिक मान्यताओं में कमल का फूल

हिन्दू और बौद्ध धर्म में कमल के फूल का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में कमल का फूल शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है हिंदू धर्म में इसका धार्मिक महत्व है। दूसरी ओर हिन्दू धर्म के अनुसार कमल का फूल उनके कई देवताओं से जुड़ा हुआ है, जैसे लक्ष्मी जो हिन्दू धर्म के अनुसार समृद्धि की देवी हैं, वो एक कमल पर विराजमान हैं, इसके अलावा हिन्दू भगवान ब्रह्मा और विष्णु से भी इस फूल को लेकर मान्यताएं हैं।
kamal-ka-phool ॥ कमल के फूल का फोटो

दूसरी तरफ बौद्ध कमल के फूल को भगवान बुद्ध का सर्वोच्च शिक्षण मानते हैं। इसके अलावा बौद्ध धर्म के अनुसार कमल का फूल आठ गुना पथ के सिद्धांत का रूप है। हिन्दू धर्म की तरह बौद्ध धर्म में भी कमल पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। जैसा कि हम जानते हैं कि कमल कई रंगों में पाया जाता है, बौद्ध धर्म में फूल के रंगों को लेकर भी अलग अलग मान्यताएं हैं। गुलाबी कमल को सर्वोच्च और सबसे बड़ा ज्ञानवर्धन माना जाता है। नीले रंग का कमल ज्ञान का प्रतीक है। सफेद कमल में पूर्ण आध्यात्मिकता होती है और लाल कमल को हृदय के प्रतीक के रूप में माना जाता है। इसके अलावा बैंगनी रंग का कमल का महत्व रहस्यवाद है और यह बौद्ध धर्म के गूढ़ संप्रदायों का प्रतिनिधित्व है।

कमल का महत्व और विशेषताएं (importance and benefits of Lotus flower)

कमल एक जलीय पोधा है, यानी ये पोधा वहां पाया जाता है जिस स्थान पर पानी और उसकी नमी होती है। कमल को एक जलीय जड़ी बूटी भी कहा जाता है। कमल का फूल तालाबों, झीलों, खाइयों के उथले पानी, बड़े गढढो में जमे पानी में उगता हुआ पाया जाता है। ये बहुत से कामों जैसे उपचार आदि में इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी वजह से कई जगह पर कमल की खेती भी की जाती है। कमल की खेती के लिए हमारा भारत काफी प्रसिद्ध है।
kamal-ka-phool ॥ कमल के फूल का फोटो

कमल का, सिर्फ फूल ही नहीं बल्कि इसका तना, पत्तियां और बीज भी काफी उपयोग में लिए जाते हैं, इनमें से कई फूल और बीजों को खाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। चलिए जानते हैं कमल के महत्त्व और विशेषताओं के बारे में।


1 कमल का तना

कमल का तना मोटा और मांसल होता है, जिसे प्रकंद कहा जाता है। ये जलीय स्थानों जैसे तालाबों गढढों आदि जल स्रोतों के तल के कीचड़ में बढ़ता है। यह पौधे को मिट्टी से अनुरक्त रखने के लिए जड़ों के गुच्छों को बंद कर देता है।


2 कमल की पत्तियां

कमल की पत्तियां गोल आकार की होती हैं, जो बीच के पतले डंठल में जड़ी रहती हैं। इन पत्तियों को 'पुरइन' कहते हैं। पत्ती का व्यास 60 और 80 सेमी के बीच भी हो सकता है। इन पत्तियों के ऊपरी हिस्से चमकीले और हरे रंग के होते हैं, जबकि इनकी निचली सतह पर लाल रंग पाया जाता है।
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 कमल की पत्तियों में न्यूसिफेरिन, कैल्शियम, फ़ॉस्फ़रस, शर्करा, एस्काबिंक एसिड, विटामिन बी और विटामिन सी की मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा पत्तियों का प्रयोग चेहरे को निखारने के लिए भी किया जाता है। ये पत्तियां बड़ी एवं गोल आकार की होती हैं, जिसकी वजह से कई जगह पर इन्हें प्लेट के रूप में भोजन परोसने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।


3 कमल का फूल

कमल के फूल बहुत ही सुन्दर दिखाई देते हैं इसे इसके रंग और आकार के अनुसार कई जातियों में बाटा गया है। प्रत्येक जाति के कमल एक दूसरे से आकृतियों में भिन्न होते हैं। अधिकतर जगहों पर लाल, सफेद और नीले रंग के कमल देखे जाते हैं, कहीं कहीं पीला कमल भी मिलता है। इन फूलों का निचला भाग जो पानी की तरफ रहता है, वो बहुत ही नरम और हलके रंग का होता है। कमल की कली प्रातःकाल के समय में खिलती है। ये फूल चैत बैसाख में फूलने लगता है और सावन भादों तक फूलता है। सब फूलों की पंखड़ियों या दलों का संख्या समान नहीं होती। पंखड़ियों के बीच में केसर से घिरा हुआ एक छत्ता होता है।
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कमल के फूल का प्रयोग कई बीमारियों को दूर करने के लिए ओषधि के रूप में किया जाता है। जिसमें पित्त, गर्मी, रक्त विकार, बवासीर मूत्रविकार, अतिसार, त्वचा रोग, रक्तस्त्राव आदि बीमारियां शामिल हैं। इन सब बीमारियों में कमल एक ओषधि की भूमिका निभाता है।कमल की पत्तियों के अलावा फूल में भी न्यूसिफेरिन, कैल्शियम, फ़ॉस्फ़रस, शर्करा, एस्काबिंक एसिड, विटामिन बी और विटामिन सी की मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा इस फूल को गुलकंद और इत्र आदि बनाने में उपयोग किया जाता है।


4 कमल के बीज

 कमल के बीज का अपना अलग ही महत्व होता है, कमल के कुछ बीज ऐसे भी होते हैं जो काफी लम्बे समय तक जिंदा रहते हैं। कमल का फूल ही नहीं इसके साथ इसका बीज भी आयुर्वेदिक, एलोपैथिक आदि दवाइयाँ बनाने में किया जाता है। कमल प्राय: उष्णकटिबंधीय भागों में पाया जाता है। जिसमे ईरान, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत आदि प्रमुख हैं। कमल के कई बीजों को भोजन के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। कमल के सूखे बीजों में प्रोटीन, वसा और कार्बोहड्रेड की अच्छी मात्रा पाई जाती है।


    संक्षेप में अगर कहा जाए तो कमल एक बहुत ही अनोखा पोधा है। इसकी पत्तियां और फूल भोजन के रूप में, ओषधि के रूप में, सुंदरता बढ़ाने के लिए, खाना परोसने के लिए, खुशबू आदि के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यही कारण है कि कई जगह पर कमल की खेती का काम भी किया जाता है। जिसमे भारत को भी अहम स्थान प्राप्त है। बल्कि भारत का तो प्राचीन काल से ही कमल के साथ गहरा संबंध है।

कुछ आवश्यक जानकारियां-
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धन्यवाद।

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